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जरा तहज़ीब से पेश आना मेरे दोस्त, बिहार हूँ मैं

  • Posted on:2019-11-02
जरा तहज़ीब से पेश आना मेरे दोस्त, बिहार हूँ मैं

गंगा किनारे बसा एक सुन्दर सा गाँव हूँ मैं,
जिसके बिना भारत अधूरा है वो श्रृंगार हूँ मैं,
जहाँ होता बड़ों का आदर और छोटो को मिलता प्यार,
ऐसी संस्कृति का भण्डार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं।

सीताजी का मायका और रामजी का ससुराल हूँ मैं,
बुद्धजी के ज्ञान का जन्मस्थान हूँ मैं,
चाणक्य की चतुराई और चन्द्रगुप्त का साम्राज्य हूँ मैं,
कलिंगा का प्रस्थ और अशोक की तलवार हूँ मैं,
दिनकर की जन्मभूमि और राजेंद्र का घर बार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं।

देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का राज्य हूँ मैं,
भाषा-संस्कृति और ज्ञान का खेत-खलियान हूँ मैं,
रंगमंच के कलाकार और देश की सेवा करने वालों का भण्डार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं।

हर साल बाढ़ से पीड़ित होकर खुद के बलबूते खड़ा हो जाता हर बार हूँ मैं,
फ्राइडे-सटरडे-संडे नहीं, सुक्कर-सनीचर और ऐतवार हूँ मैं,
बर्गर-पिज़्ज़ा छोड़ो जी, लिट्टी-चोखा और अचार हूँ मैं,
महापर्व छठी मैया का त्यौहार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं।

खुद में बसा खुद में समाया एक छोटा सा संसार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना मेरे दोस्त, बिहार हूँ मैं।

About Suraj Kumar Goel

Suraj is an IT Professional, Shayar, Blogger. He is also involved in different social activities and working on different projects.