Kavita & Shayari

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मेरी ज़िद

मेरी ज़िद
वो ज़िद भी मेरी अजीब थी,
एक बारिश की ज़िद थी,
मैंने बादल से यारी कर ली।   मंजिल की तलाश में मैं मुसाफ़िर,
चल पड़ा एक अनजान सफर की ओर,
गुमनाम चाहत की हसरत थी,
वो ज़िद भी अजीब थी।
  मिल जाए आसानी से तो ये ज़िद कैसी है,
है ख़्वाहिशें हजार, ये ज़िद कैसी है,
पर ज़िद तो है उ&
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मेरी कविता मुझे कुछ खास बना गया..
अल्फ़ाज़ों को जोड़कर कविता बना गया,
मेरी कविता मुझे कुछ खास बना गया।

मेरे अल्फ़ाज़ अक्सर दबे पाँव यूँ ही चला आता है,
कभी खयालों में, कभी यादों में मुलाकात हो पता है,
इसे इतफ़ाक कहूँ या कहूँ कुछ और, समझ नहीं आता है।

मैं अपने ही सुर को दोहराता हूँ,
मैं वही पुरानी द&
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मेरी आवाज़ भी सुनो...
मेरी आवाज़ भी सुनो,
अपनी बात सुनाता हूँ।
भीड़ मे कही खो सा गया हूँ,
खुद से नजरें चुराता हूँ।

मेरी आवाज़ भी सुनो,

किस्मत भले ही मुझ पर मेहरबान नही,
खुद को अपना दर्द सुनाता हूँ,
देखकर सारी दिशाएं, महसूसकर सारी फ़िज़ाएं, 
ज़माने को समझ नहीं पता हूँ।

मेरी आवाज़ &
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मुझे कहना है....
मुझे कहना है बातें बहुत, पर लफ्ज़ जुबाँ पर आते नहीं।

खामोश सा रहने लगा हूँ,
अब बिन बात के मुस्कुराने लगा हूँ।

दिल में छिपा एक राज़ है मेरे,
कहना चाहता हूँ मैं उसे साँझ-सवेरे।

फीर रहा हूँ दर-बदर मैं, मन में अपने एक राज़ दबाए,
मिल जाए कोई ऐसा, जिसे दिल का हाल सुनì
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मैं और मेरी कविता...
मैं और मेरी कविता, हो जैसी नदी की निर्मल धारा।
मन मंदिर में समाई जैसे मेरे जीवन की धारा।

तेरे यादों के सागर में ऐसे डूबा रहता हूँ,
जैसे तुम मदिरा और मैं प्याला।

पन्नो में लिखे अल्फ़ाज़, मेरे जिंदगी के अरमान है।
मेरी मंज़िल मेरी कविता मेरे सपनो की जान है।


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