Kavita & Shayari

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Happy Friendship Day

Happy Friendship Day
आज मिले हैं कुछ पल फुरसत के,
यादों के किस्से, सुनाने की तमन्ना है।
 
थी वो महफिलें यारों की, खुशियों के बहारों की,
आज फिर उसे याद कर, मुस्कुराने की तमन्ना है।
 
था कभी बेवजह हँसना, कभी मुस्कुराना,
तो कभी यूँ था शोर मचाना,
आज फिर वो जिंदगी, जीने की तमन्ना है।
 
थी सुबह की रौशनी और शाम की लाली,
होती थी दोस्तों संग, हाथों में चाय की प्याली,
था नशा हर उस प्याले का,
आज वो जाम, पीने की तमन्ना है।
 
था सिखाया उसने गमो पे भी हंसना,
लड़खड़ाते राहों पर कैसे था चलना,
उम्मीदों की आस लिए सबसे है दूर,
आज फिर तुमसे, मि
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मैं और बारिश

मैं और बारिश
ना जाने कितने जलवे है तेरे बारिश, कभी आशिकी, कभी बेवफाई तो कभी बचपन का साथ लगती ये बारिश।   वो थी अपनी बचपन और हमारी ख्वाहिश, कागज की कश्ती बना, करता था उसकी नुमाईश। कीचड़ पर तेरे कदमो निशां था चलना, वो गुजरा बचपन और वो गुजरी बारिश।   चलते चलते आई जवानी, उमड़ पड़ी फिर अपनी ख्वाहिश, संग भींग चल मेरे, करता तुझसे गुजारिश। यूँ सीने से लगा कर हो जाऊं मैं मदहोश, आज सावन के झूलों में बैठा हुआ है बारिश।   पहले छप छप से आती थी बारिश, बिन छाते के नहलाती थी बारिश। अब दफ्तर के खिड़की से झांकती, हँस कर मुझपर, जोरो से चिढ़ाती है बारिश।   ये रिमझिम बुँदे करता हजारों साजिश, ना आए
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आज का अख़बार

आज का अख़बार
छोटे बड़े शहरों के अख़बारों में क्या छपता, घर पर आते अखबार भी बुजुर्ग सा लगता।   सरकारें अफरा तफरी में, दफ्तर बड़ा बेहाल रहता, देश विदेश तू तू मैं मैं, जनता ये अख़बार पढता।   देश का बनिया लूट चवन्नी परदेश में जा छिपता, मरती है बदहाल किसानी और भारत का लाल मरता।   होती राज गुंडों की वो पन्नो में छप जाता, नेताजी के कर्मो का मसाला भी तीखा लगता।   अब तो ग़ालिब परेशान मन यही है कहता, अख़बार में न्याय छोड़ सब कुछ है छापता।
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मन का बच्चा

मन का बच्चा
खुद को सताते है, खुद ही को मनाते है, एक छोटे बच्चे की तरह, उम्मीदों को खिलौना बना उसी में खो जाते है, एक छोटे बच्चे की तरह।   खुद को गिराते है, खुद ही को सँभालते है, एक छोटे बच्चे की तरह, फिर सारे दर्द भूल यूँ खिलखिलाते है, एक छोटे बच्चे की तरह।   खुद को समझाते है और खुश हो जाते है, एक छोटे बच्चे की तरह, ना कोई गुजारिश और ना सिफारिस करते है, एक छोटे बच्चे की तरह।   खुद को खामोश रख, खुद को ही बहलाते है, एक छोटे बच्चे की तरह, अपनों की तलाश में रास्ते भटक जाते है, एक छोटे बच्चे की तरह।
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GST

GST
GST का देखो खूब मचा है शोर, चली ऐसी हवा, घुस गया हर है छोर। ना समझ आया ये पहेली अब तक हमें, कोई है खुश तो कोई डरा है उस ओर।
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