Kavita & Shayari

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एक कश...

एक कश...
धुएँ की एक कश लेते हैं, चल यार सिगरेट पीते हैं।
समय से चुरा के कुछ वक़्त, कुछ जिंदगी जीते हैं।

न खुशियों का न गमों का कसूर होता है,
जिंदगी में आएंगे दोनों ही ये ही दस्तूर होता है,
इसी उम्मीद में रोज ये जिन्दगी जीते हैं,
चल न भाई सिगरेट पीते है।
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जिंदगी और जाम...
जिंदगी और जाम के नाम पे अर्ज़ करता हूँ...

कि मैं हूँ शराबी, पी जो शराब मयखाने में,
दुनिया रंगीन लगने लगी है अपने खयालो में।

सपनों की दुनिया मे खो जाता हूँ मैं,
जब ये शराब की बोतल आती है प्यालों में।

हर शख्स ये कहता, देखो पीकर गम को भुला रहा है,
दुनिया में चैन-ओ-&#
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ऐ चांद जलवे तो तेरे ही है...
छा जाए अँधेरा जब चारों ओर,
तब टिमटिमाता रहूँ मैं जुगनू बनकर।

ऐ चाँद कल देखा अटारी से तुझको,
जलवे तो तेरे ही हैं,
यूँ तो सूरज में है तेज और चमक ज्यादा,
पर प्यार की बातें तुझमे ही है।

तेरे सफ़ेद रौशनी के आँचल में खो जाऊं,
दुआ मांगता है तेरे ही दर पर,
नहीं चाहि
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फुर्सत के पल...
आज मिले है कुछ पल फुर्सत के,
आज खुद को बर्बाद करने की तम्मना है।

बहुत था बिजी,
कुछ पल बस यूँ ही, कुछ किये बिना,
आज समय बिताने की तम्मना है।

कभी बेबजह हँसना, कभी मुस्कुराना,
कभी यूँ ही शोर मचाना,
आज खुद से ही बातें करने की तम्मना है।

भीड़ से दूर अकेला हूँ मैæ
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नशा

नशा
आज हल्की हल्की बारिश हुई, सर्द हवा का रक़्स भी था।
फूल भी निखरे निखरे हैं, उसपे आपका अक्स भी था।
आज है बादल काले गहरे, ना है सूरज का लहू।
नशा तो जरूर है उनकी याद का, कुछ नशा इस धीमी बरसात का था।
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