Kavita & Shayari

ख़ामोशी भरी आवाज
पता नही कहाँ पर, क्या टूट गया है? थोड़ा ठहरो ध्यान से देखो, कौन और क्या छूट गया है? हर प्यासे के कंठ में, जहर का कितना घूँट गया है? खामोशी के फरिश्तों की छाँव में अब, कौन लुट गया है? पता करो आज़ाद इंसान से आज, कौन रूठ गया है? #StayHomeStaySafe
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मैं हूँ बंदा गाँव वाला, औरो जैसी मेरी कहानी नहीं
मैं हूँ बंदा गाँव वाला, औरो जैसी मेरी कहानी नहीं,
हूँ मैं सीधा साधा, मन में कोई बेईमानी नहीं,
माना नहीं है मेरे पास बंगला और बड़ी गाड़ी,
लेकिन जो मोहब्बत है मेरी वो जिस्मानी नहीं। जख़्म बहुत है तेरे दिए हुए, लेकिन मैं अपना मर्ज़ दिखा सकता नहीं,
जानता हूँ वो नए वाला मुझसे ज्यादा अमीर है, पर मुझसे ज्यादा वो तुझपे खर्च कर सकता नहीं,
मैं हूँ बंदा गाँव वाला, औरो जैसी मेरी कहानी नहीं। चोट हालातों की है अब दवा से ठीक होगी नहीं,
इश्क़ में रंजिश हुई है वफ़ा से ठीक होगी नहीं,
क्या बताऊँ मैं मेरी मंजिल का सफर इसे होना चाहिए था इतना भी सख्त नहीं,
इतना समझ लो मेरी आँखों में नींद
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जरा तहज़ीब से पेश आना मेरे दोस्त, बिहार हूँ मैं
गंगा किनारे बसा एक सुन्दर सा गाँव हूँ मैं,
जिसके बिना भारत अधूरा है वो श्रृंगार हूँ मैं,
जहाँ होता बड़ों का आदर और छोटो को मिलता प्यार,
ऐसी संस्कृति का भण्डार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं। सीताजी का मायका और रामजी का ससुराल हूँ मैं,
बुद्धजी के ज्ञान का जन्मस्थान हूँ मैं,
चाणक्य की चतुराई और चन्द्रगुप्त का साम्राज्य हूँ मैं,
कलिंगा का प्रस्थ और अशोक की तलवार हूँ मैं,
दिनकर की जन्मभूमि और राजेंद्र का घर बार हूँ मैं,
जरा तहज़ीब से पेश आना, बिहार हूँ मैं। देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का राज्य हूँ मैं,
भाषा-संस्कृति और ज्ञान का खेत-खलियान
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मैं और मेरी प्रिये की अनोखी कहानी
तुम मुम्बई की बाला हो, मैं बिहार का रहने वाला प्रिये!
तुम पॉप म्यूजिक सुनने वाली और मैं सुनता मधुशाला प्रिये। तुम शशि थरूर की अंग्रेज़ी सी, मैं लालूजी का भाषण प्रिये!
तुम अमेज़न की फ़ेस्टिव सेल हो और मैं बनिए वाला राशन प्रिये। तुम अमेरिकन डॉलर सी, मैं गाँधी वाला नोट प्रिये!
तुमको मैं चाहने वाला, और तुम करती दिल पे चोट प्रिये। तुम खूबसूरत कश्मीर की वादी, मैं 370 की धारा प्रिये!
तुम अमित साह की सूझ बुझ हो और मैं विपक्ष सा बेचारा प्रिये। तुम शहरों में रहने वाली, मैं शुद्ध देशी गंवार प्रिये!
तुम चौथी ट्रॉफी हो मुंबई की और मैं चेन्नई की 1 रन की हार प्रिये। मैं भगवाधा
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उसे हुआ था प्यार और हमें इश्क़ हुआ था
एक बार एक शख्स से हमें इश्क़ हुआ था,
मुद्दत हुई है यार हमें इश्क़ हुआ था। दुनिया में और भी थे काम करने को मगर,
कितने थे हम बेकार कि हमें इश्क़ हुआ था। कहते है ये मर्ज़ है लाइलाज,
रहते थे हम बीमार हमें इश्क़ हुआ था। कुछ इसलिए भी वो भूल गए हमें,
उसे हुआ था प्यार और हमें इश्क़ हुआ था।
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